CJP का CEC ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे का अल्टीमेटम, इस्तीफा नहीं तो देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
कॉकरोच जनता पार्टी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर उठाए सवाल; CEC के इस्तीफे, SIR रोकने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाले 2023 कानून को बदलने की मांग
संपादकीय सार (मुख्य बिंदु)Key Facts
- १.CJP ने CEC ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे में इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया है।
- २.पार्टी ने SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया पर रोक लगाने और संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की है।
- ३.CJP चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून में बदलाव चाहती है।
- ४.चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेदों को सामान्य निर्णय-प्रक्रिया का हिस्सा बताया है और अपने फैसलों को कानूनी व सर्वसम्मत कहा है।
- ५.CJP ने 'Election Commission Thik Karo' नाम से देशव्यापी अभियान शुरू करने की घोषणा की है।

नई दिल्ली में गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस की। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने CEC को 48 घंटे के भीतर इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो CJP देशभर में आंदोलन शुरू करेगी और दिल्ली में “जंतर-मंतर 2.0” के तहत धरना दिया जाएगा।
CJP की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐसे समय हुई है जब चुनाव आयोग के भीतर Special Intensive Revision (SIR) और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर कथित असहमति की एक रिपोर्ट सामने आई है। Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें मतदाताओं के नाम जोड़ने-हटाने, Form 6 में बदलाव और चुनावी डेटा तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं।
CJP ने चुनाव आयुक्त पर लगाए क्या आरोप?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की मौजूदा कार्यप्रणाली से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने SIR के दौरान मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर भी सवाल उठाया और कहा कि आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि नाम हटाने का आधार क्या है और प्रभावित मतदाताओं के लिए समीक्षा की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
CJP ने विशेष रूप से चुनावी डेटा के केन्द्रीयकरण, मतदाता सूची में बदलाव और नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े Form 6 में कथित बदलावों पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण की मांग की। पार्टी ने कहा कि चुनाव आयोग को संबंधित आपत्तियों और उन पर दिए गए जवाबों को सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि इन दावों की स्वतंत्र जांच हो सके।
हालांकि, ये CJP के आरोप और मांगें हैं। चुनाव आयोग ने कहा है कि आयोग के भीतर अलग-अलग राय, लिखित टिप्पणियां और तकनीकी सुझाव सामान्य निर्णय-प्रक्रिया का हिस्सा हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि SIR समेत उसके फैसले कानूनी आधार पर और तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं।
CJP की तीन बड़ी मांगें
प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP ने चुनाव आयोग के सामने कई मांगें रखीं। इनमें प्रमुख रूप से:
चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और उनके कार्यकाल से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र जांच हो।
SIR से जुड़े नाम हटाने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए और संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को बदला जाए, ताकि नियुक्ति प्रक्रिया में व्यापक संस्थागत और नागरिक भागीदारी हो।
CJP ने इसके अलावा आगामी चुनावों को फिलहाल रोकने और SIR को 2025 की मतदाता सूची की स्थिति पर वापस ले जाने की भी मांग रखी। पार्टी ने SIR से संबंधित रिकॉर्ड को सुप्रीम कोर्ट की निगरानी वाली समिति के संरक्षण में रखने की मांग भी की।
‘48 घंटे बाद आंदोलन’
अभिजीत दीपके ने कहा कि CEC को 48 घंटे का समय दिया जा रहा है। अगर इस अवधि में इस्तीफा नहीं दिया जाता है तो CJP देशभर में विरोध-प्रदर्शन शुरू करेगी। दिल्ली में अनिश्चितकालीन धरने और “जंतर-मंतर 2.0” की बात भी कही गई है। इसके साथ ही संगठन ने “Election Commission Thik Karo” नाम से देशव्यापी अभियान शुरू करने का ऐलान किया।
CJP के प्रवक्ताओं ने चुनाव को नागरिकों के पास मौजूद व्यवस्था बदलने का प्रमुख संवैधानिक माध्यम बताते हुए कहा कि अगर मतदाता सूची और मतदान प्रक्रिया को लेकर लोगों का भरोसा प्रभावित होता है तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर इसका असर पड़ सकता है। यह संगठन का राजनीतिक दावा है, जिसका स्वतंत्र निष्कर्ष के रूप में स्थापित होना अलग विषय है।
SIR को लेकर विवाद
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची के व्यापक पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। मौजूदा विवाद उस रिपोर्ट के बाद तेज हुआ जिसमें चुनाव आयोग के दो आयुक्तों द्वारा कई फैसलों पर आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात सामने आई।
रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों में मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया, नए मतदाताओं के लिए Form 6 और चुनावी रोल के डेटा तक पहुंच से जुड़े मुद्दे शामिल थे। CJP का कहना है कि इन मुद्दों और संबंधित आंतरिक टिप्पणियों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कथित मतभेदों को संस्थागत निर्णय-प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा बताया है और कहा है कि उसके अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।
अब आगे क्या?
CJP के 48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद अब ध्यान इस बात पर रहेगा कि CEC ज्ञानेश कुमार की ओर से इस मांग पर कोई प्रतिक्रिया आती है या नहीं और यदि इस्तीफा नहीं होता है तो CJP अपने घोषित देशव्यापी आंदोलन को किस रूप में आगे बढ़ाती है। साथ ही, SIR और चुनाव आयोग के भीतर कथित आपत्तियों को लेकर एक बड़ा सवाल यह भी बना हुआ है कि क्या संबंधित आंतरिक रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएंगे और क्या उन पर स्वतंत्र जांच होगी।
फिलहाल CEC के इस्तीफे की मांग, SIR पर रोक और देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी CJP की मांगें हैं; इन्हें चुनाव आयोग के खिलाफ सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि संगठन के आरोपों और राजनीतिक मांगों के रूप में देखा जाना चाहिए। चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर SIR और अपनी निर्णय-प्रक्रिया को कानूनी तथा सर्वसम्मत बताया है।
