इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’: शिक्षा, रोजगार और भर्ती पर सवाल, राहुल गांधी ने साधा सरकार पर निशाना
इंदौर में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में युवाओं ने शिक्षा, रोजगार, भर्ती परीक्षाओं और पेपर लीक जैसे मुद्दे उठाए। राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधा, जबकि भाजपा ने कार्यक्रम और उनके दावों पर पलटवार किया।
संपादकीय सार (मुख्य बिंदु)Key Facts
- १.इंदौर में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम कांग्रेस द्वारा आयोजित किया गया था।
- २.युवाओं ने शिक्षा, रोजगार, भर्ती परीक्षाओं में देरी और पेपर लीक जैसे मुद्दे उठाए।
- ३.राहुल गांधी ने सरकार पर 'सिस्टम स्टूडेंट से डरता है' का आरोप लगाया।
- ४.मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राहुल गांधी के आरोपों को 'झूठ की गूंज' बताया।
- ५.कार्यक्रम छात्रों की समस्याओं से शुरू होकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल गया।

इंदौर में 19 सितंबर को कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सवाल सामने आए। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के अलावा अलग-अलग क्षेत्रों से आए युवाओं ने अपनी परेशानियां साझा कीं। एक एमपीपीएससी अभ्यर्थी ने बताया कि परीक्षा की तैयारी करते-करते उसकी उम्र सीमा निकल गई, जबकि नर्सिंग की एक छात्रा ने कहा कि 2020 में दाखिला लेने के बावजूद 2026 तक उसकी पढ़ाई पूरी नहीं हो सकी। प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी, रिक्त पदों और भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी छात्रों ने सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने छात्रों की बात सुनने के बाद शिक्षा व्यवस्था और सरकार की नीतियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “सिस्टम को स्टूडेंट नहीं, अंधभक्त चाहिए।” उन्होंने छात्रों को जिज्ञासु बताते हुए कहा कि छात्र सवाल करता है और जानना चाहता है कि चीजें ऐसी क्यों हैं। उन्होंने पेपर लीक, बेरोजगारी और संस्थाओं के कामकाज को लेकर भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
राहुल गांधी ने कार्यक्रम में कहा कि “सिस्टम स्टूडेंट से डरता है” और आरोप लगाया कि देश की व्यवस्था सवाल पूछने वाले छात्रों को आगे नहीं बढ़ाना चाहती। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों के भीतर सवाल पूछने और संवाद करने की क्षमता लोकतंत्र के लिए जरूरी है। ये राहुल गांधी द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।
भाजपा की ओर से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कार्यक्रम को “छात्रों की गूंज नहीं, झूठ की गूंज” बताया और कहा कि मध्य प्रदेश के विकास पर चर्चा “तथ्यों और आंकड़ों के साथ” होनी चाहिए। यादव ने राज्य में शिक्षा के बजट, स्कूलों में बदलाव और ड्रॉपआउट दर का उल्लेख करते हुए कांग्रेस के शासनकाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार बच्चों की शिक्षा सुधारने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए लगातार काम कर रही है।”
इससे पहले भाजपा के प्रदेश सह मीडिया प्रभारी आलोक दुबे ने ‘झूठ की गूंज’ पोस्टरों को छात्रों की प्रतिक्रिया बताया था और कहा था कि इनमें राहुल गांधी के खिलाफ संदेश दिया गया है। वहीं कांग्रेस ने इन पोस्टरों के पीछे भाजपा का हाथ होने का आरोप लगाया था।
इस तरह इंदौर का कार्यक्रम छात्रों की शिक्षा और रोजगार की समस्याओं से शुरू होकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप तक पहुंच गया। छात्रों के उठाए मूल सवाल, भर्ती में देरी, परीक्षा व्यवस्था और रोजगार, अब इस राजनीतिक बहस के बीच कितने प्रभावी ढंग से आगे बढ़ते हैं, यह देखना बाकी है।
