जमुई कांड में अब पीड़ित की पहचान के साथ वीडियो वायरल करने वालों पर भी FIR, 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पुलिस के निशाने पर

नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के मामले में साइबर थाने में केस दर्ज, पुलिस ने वीडियो शेयर या फॉरवर्ड नहीं करने की अपील की

संपादकीय सार (मुख्य बिंदु)Key Facts

  • १.जमुई में नाबालिग से बदसलूकी के मामले में वीडियो वायरल करने वालों पर FIR दर्ज की गई है।
  • २.लगभग 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पुलिस के निशाने पर हैं जिन्होंने पीड़िता की पहचान उजागर की।
  • ३.POCSO एक्ट की धारा 23 के तहत नाबालिग की पहचान सार्वजनिक करना अपराध है।
  • ४.पुलिस ने लोगों से ऐसे वीडियो को शेयर या फॉरवर्ड न करने की अपील की है।
  • ५.इस मामले में अब तक तीन नाबालिग आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और SIT जांच कर रही है।
जमुई कांड में अब पीड़ित की पहचान के साथ वीडियो वायरल करने वालों पर भी FIR, 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पुलिस के निशाने पर
तस्वीर साभार: संपादकीय अपलोड

बिहार के जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ हुई बदसलूकी और छेड़छाड़ के मामले में पुलिस ने अब वीडियो के प्रसार पर भी कार्रवाई शुरू कर दी है। साइबर थाने में करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पुलिस के मुताबिक, इन प्रोफाइल से ऐसा वीडियो प्रसारित किया गया जिसमें नाबालिग पीड़िता की पहचान छिपाई नहीं गई थी।

जमुई के एसपी विश्वजीत दयाल ने लोगों से नाबालिग से जुड़ा वीडियो शेयर या वायरल नहीं करने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि सिर्फ वीडियो शेयर करना और नाबालिग की पहचान उजागर करते हुए वीडियो प्रसारित करना एक बात नहीं है। इस मामले में कार्रवाई का आधार पहचान उजागर होना है। POCSO एक्ट की धारा 23 में बच्चे की पहचान सार्वजनिक करने पर रोक है। कानून में नाम, पता, तस्वीर, स्कूल या ऐसी कोई जानकारी प्रकाशित करने से रोका गया है जिससे बच्चे की पहचान हो सके।

यह कार्रवाई 19 सितंबर की उस घटना की जांच के साथ चल रही है, जिसमें जमुई में कोचिंग से लौट रहे नाबालिग छात्र-छात्रा को रास्ते में रोककर उनके साथ बदसलूकी और मारपीट की गई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज की। अब तक तीन नाबालिग आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। पुलिस के अनुसार, 7 से 8 युवकों की भूमिका जांच के दायरे में है।

इससे पहले पुलिस ने वीडियो प्रसारित करने वाले 32 सोशल मीडिया अकाउंट के खिलाफ टेकडाउन कार्रवाई शुरू की थी। अब करीब 120 प्रोफाइल पर FIR दर्ज होने से जांच का दायरा और बढ़ गया है।

पुलिस घटना में शामिल बाकी लोगों की भूमिका की जांच कर रही है, साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि नाबालिग की पहचान वाला वीडियो किन-किन डिजिटल अकाउंट से प्रसारित हुआ। पुलिस ने लोगों से वीडियो को आगे शेयर न करने की अपील की है।