कर्नाटक में सरकारी भर्ती पर इतने सवाल क्यों उठ रहे हैं? सरकार कब देगी जवाब?

कर्नाटक KPSC भर्ती में प्रश्नपत्र लीक और कथित लेन-देन के आरोपों से सवाल उठे हैं। अभ्यर्थी जांच, पारदर्शिता और भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं।

संपादकीय सार (मुख्य बिंदु)Key Facts

  • १.KPSC की 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक और भ्रष्टाचार के आरोप हैं।
  • २.मामले की जांच अपराध जांच विभाग (CID) कर रहा है और इसमें एक आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को गिरफ्तार किया गया है।
  • ३.अभ्यर्थियों ने बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन कर स्वतंत्र जांच और भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांग की है।
  • ४.आरोप है कि नौकरी दिलाने के नाम पर 80 लाख रुपये तक की मांग की गई और 52 लाख रुपये के आभूषण खरीदे गए।
  • ५.कर्नाटक उच्च न्यायालय ने KPSC के तत्कालीन अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहुकार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।
कर्नाटक में सरकारी भर्ती पर इतने सवाल क्यों उठ रहे हैं? सरकार कब देगी जवाब?
तस्वीर साभार: संपादकीय अपलोड

कर्नाटक में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भर्ती से जुड़ी एक और खबर चिंता बढ़ाने वाली है। मामला कर्नाटक लोक सेवा आयोग यानी KPSC की भर्ती से जुड़ा है। आरोप हैं कि 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र कुछ अभ्यर्थियों तक पहले ही पहुंच गया था। पैसे लेकर चयन कराने और भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप भी लगे हैं। मामले की जांच अपराध जांच विभाग कर रहा है।

कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है अब देखना ये होगा की युवाओं के लिए आए दिन न्याय की मांग करने वाले लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी इस परिस्थिति से कैसे निपटेंगे। हालाँकि KPSC विवाद पर भाजपा की ओर से कोई नई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। इससे पहले भाजपा नेता स्वतंत्र जांच और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर चुके हैं।

अब जरा पूरा मामला घटनाक्रम से समझते हैं।

8 और 9 जनवरी 2026 को परीक्षा हुई :- KPSC ने 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों के पदों के लिए परीक्षा कराई। इसके बाद कुछ अभ्यर्थियों के अंकों और चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे। आरोप लगाया गया कि कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र मिल गया था।
फिर मई में एक और शिकायत सामने आई :- इसमें आरोप लगाया गया कि भर्ती से जुड़ी गोपनीय जानकारी कुछ लोगों तक पहुंचाई गई। नौकरी दिलाने के नाम पर बड़ी रकम मांगने की बात भी सामने आई। शिकायत में 80 लाख रुपये तक की कथित मांग का जिक्र था।
24 जुलाई को मामला और गंभीर हो गया :-400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती को लेकर प्राथमिकी दर्ज हुई। इसमें प्रश्नपत्र लीक करने, उत्तर पुस्तिका में कथित बदलाव और पैसे के लेन-देन जैसे आरोप लगाए गए। प्राथमिकी में 29 अभ्यर्थियों के नाम भी शामिल किए गए। इसके बाद जांच अपराध जांच विभाग को सौंप दी गई।
29 अगस्त को गिरफ्तारी हुई :- KPSC के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक रहे आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को गिरफ्तार किया गया। जांच में कथित पैसे के लेन-देन की भी पड़ताल शुरू हुई।
7 सितंबर को कर्नाटक उच्च न्यायालय का फैसला आया : - अदालत ने KPSC के तत्कालीन अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहुकार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
फिर 18 सितंबर को जांच में पैसे के लेन-देन से जुड़ी एक और जानकारी सामने आई। अपराध जांच विभाग ने अदालत को बताया कि कथित तौर पर जुटाई गई रकम में से 52 लाख रुपये के आभूषण खरीदे गए थे।
और अब 19 सितंबर को अभ्यर्थी सड़क पर हैं।
बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किया। मांग है कि KPSC की भर्ती व्यवस्था में सुधार हो और भर्ती प्रक्रियाओं की स्वतंत्र जांच कराई जाए। प्रदर्शनकारियों ने पिछले पांच-छह वर्षों की भर्तियों की भी जांच की मांग की है।
लेकिन इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल क्या है?

सरकार से सवाल है कि अगर जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो उन युवाओं का क्या होगा जिन्होंने इन परीक्षाओं के लिए सालों तैयारी की?

जिस परीक्षा में बैठने से पहले ही किसी को प्रश्नपत्र मिल जाए, वहां बाकी अभ्यर्थियों की मेहनत का क्या होगा?

प्रश्नपत्र की सुरक्षा में चूक हुई तो जिम्मेदारी किसकी है? भर्ती प्रक्रिया के किस स्तर पर गड़बड़ी हुई? और जिन भर्तियों पर सवाल उठ रहे हैं, उनमें शामिल अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर सरकार क्या करेगी?

KPSC से जुड़े दूसरे मामलों ने भी सवाल बढ़ाए हैं। आयोग के अध्यक्ष के परिवार से जुड़े एक व्यक्ति की सरकारी नियुक्ति को लेकर भी मामला दर्ज हुआ है। दूसरी ओर, प्रशासनिक सेवा की भर्ती से जुड़े मामलों की भी जांच चल रही है।

हालांकि, इन सभी मामलों में जांच अभी जारी है। इसलिए आरोपों को अंतिम सच मानना जल्दबाजी होगी।

लेकिन सरकार को जवाब देना होगा।

क्योंकि बात सिर्फ 400 सरकारी पदों की नहीं है। बात उन हजारों-लाखों युवाओं की है, जो सरकारी नौकरी के लिए अपनी जिंदगी के कई साल तैयारी में लगा देते हैं।

अब देखना यही है कि जांच के बाद कार्रवाई कितनी होती है और KPSC की भर्ती व्यवस्था में बदलाव सिर्फ कागज पर होता है या जमीन पर भी दिखाई देता है।