मोदी दिसंबर में कनाडा जा सकते हैं, व्यापार समझौते पर बातचीत के बीच रिश्तों में नया मोड़
भारत-कनाडा रिश्तों में फिर तेजी दिख रही है। मार्क कार्नी ने कहा कि व्यापार वार्ता में अच्छी प्रगति है और नरेंद्र मोदी दिसंबर में कनाडा जा सकते हैं। दोनों देश साल के अंत तक सीईपीए पूरा करने और 5 अक्टूबर से अगला दौर शुरू करने की तैयारी में हैं।
संपादकीय सार (मुख्य बिंदु)Key Facts
- १.कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भारत के साथ व्यापार वार्ता में अच्छी प्रगति की बात कही है।
- २.भारत और कनाडा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर बातचीत कर रहे हैं, जिसका लक्ष्य साल के अंत तक पूरा करना है।
- ३.दोनों देशों के बीच ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, परमाणु क्षेत्र, प्रौद्योगिकी और निवेश में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हो रही है।
- ४.यह संभावित यात्रा 2023 में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के आरोपों के बाद बिगड़े संबंधों को सुधारने का एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

भारत और कनाडा के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों की कड़वाहट के बाद अब आर्थिक और कूटनीतिक संपर्क दोबारा बढ़ता दिखाई दे रहा है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि भारत के साथ व्यापार वार्ता में अच्छी प्रगति हो रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर में कनाडा का दौरा कर सकते हैं। यह दौरा प्रस्तावित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिशों के बीच हो सकता है।
कार्नी ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान कहा कि भारत कनाडा के लिए कई स्तरों पर बेहद महत्वपूर्ण साझेदार है। उन्होंने व्यापार के साथ लोगों के बीच संबंधों और सुरक्षा सहयोग का भी उल्लेख किया। हालांकि मोदी की यात्रा की सटीक तारीख अभी तय नहीं हुई है।
बातचीत अब किस मुकाम पर है?
भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते यानी सीईपीए पर बातचीत चल रही है। दोनों देशों ने मार्च 2026 में औपचारिक रूप से वार्ता शुरू की थी और साल के अंत तक समझौता पूरा करने का लक्ष्य रखा था। जून में मोदी और कार्नी की मुलाकात के दौरान भी दोनों नेताओं ने सीईपीए वार्ता में हुई प्रगति पर संतोष जताया था।
सितंबर में बातचीत का चौथा दौर 14 से 19 सितंबर तक हुआ। इसके बाद दोनों पक्षों ने प्रक्रिया को तेज करने पर सहमति जताई। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि अगला दौर 5 अक्टूबर से शुरू होगा।
कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मैनिंदर सिद्धू ने भी कहा है कि कनाडा 2026 के अंत तक भारत के साथ सीईपीए पूरा करने को लेकर आशावादी है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, परमाणु क्षेत्र, प्रौद्योगिकी और निवेश जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की कोशिश चल रही है।
रिश्ते यहां तक कैसे पहुंचे?
भारत और कनाडा के संबंध 2023 के बाद गंभीर तनाव में चले गए थे। कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में भारत की संभावित भूमिका का आरोप लगाया था। भारत ने इस आरोप को खारिज किया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव बढ़ा और 2024 में दोनों पक्षों ने कई राजनयिकों को निष्कासित किया।
मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों देशों ने संबंधों को दोबारा सामान्य करने की दिशा में कदम बढ़ाए। मार्च 2026 में कार्नी भारत आए थे। यह 2018 के बाद किसी कनाडाई प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय भारत यात्रा थी। उस यात्रा में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, तकनीक और प्रतिभा से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की घोषणा की थी।
जून में दोनों प्रधानमंत्रियों की दोबारा मुलाकात हुई। उस समय कनाडा की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया था कि दोनों देश 2026 में सीईपीए वार्ता पूरी करने के साझा लक्ष्य पर काम कर रहे हैं। मोदी ने कनाडा आने का कार्नी का निमंत्रण भी स्वीकार किया था, लेकिन तारीख आपसी सहमति से तय की जानी थी।
कनाडा के लिए भारत क्यों महत्वपूर्ण है?
कनाडा अपनी व्यापारिक निर्भरता को अलग-अलग बाजारों में फैलाने की कोशिश कर रहा है। कनाडा सरकार ने भारत को उन साझेदारों में शामिल किया है जिनके साथ वह व्यापार और निवेश संबंधों को तेजी से बढ़ाना चाहता है। कार्नी ने सितंबर में कहा था कि कनाडा भारत समेत नए व्यापार समझौतों के जरिए अपने बाजारों और साझेदारियों का विस्तार करना चाहता है।
भारत के लिए भी कनाडा ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, शिक्षा, तकनीक और निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण है। मार्च में दोनों देशों के बीच यूरेनियम आपूर्ति का 2.6 अरब कनाडाई डॉलर का समझौता भी हुआ था। महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को लेकर भी सहयोग बढ़ाने का समझौता हुआ।
दिसंबर का दौरा क्यों महत्वपूर्ण हो सकता है?
अगर मोदी का दिसंबर दौरा तय कार्यक्रम के अनुसार होता है, तो यह केवल एक द्विपक्षीय यात्रा नहीं होगी। यह ऐसे समय में होगी जब भारत और कनाडा सीईपीए को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे होंगे और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग का नया ढांचा तैयार हो रहा होगा।
हालांकि अभी व्यापार समझौता अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है। 5 अक्टूबर से शुरू होने वाली अगली वार्ता और उसके बाद होने वाली बातचीत यह तय करेगी कि दिसंबर तक दोनों देश किसी अंतिम समझौते तक पहुंच पाते हैं या नहीं। कार्नी ने बातचीत में प्रगति की बात कही है, लेकिन समझौते के अंतिम परिणाम पर अभी कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
