TMC का नाम-चिह्न विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, ममता गुट ने दी EC के फैसले को चुनौती
ममता बनर्जी गुट ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिन्ह पर EC के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
संपादकीय सार (मुख्य बिंदु)Key Facts
- १.ममता बनर्जी गुट ने चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
- २.चुनाव आयोग ने 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'जोड़ाफूल' चिह्न पर रोक लगाई है।
- ३.आयोग ने ममता गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चिह्न दिया है।
- ४.अरूप रॉय गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' और 'लिफाफा' चिह्न आवंटित किया गया है।
- ५.यह व्यवस्था फिलहाल उपचुनावों के लिए है, मूल नाम और चिह्न पर अंतिम फैसला बाद में होगा।

खबर क्या है?
तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे तक पहुंच गया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने चुनाव आयोग के उस अंतरिम फैसले को चुनौती दी है, जिसमें आयोग ने फिलहाल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न को रोक दिया है।
आयोग के मुताबिक, पार्टी के भीतर दो प्रतिद्वंद्वी गुट सामने आए हैं। इनमें से एक गुट ममता बनर्जी का है और दूसरा TMC के क़द्दावर नेता अरूप रॉय का है। इसलिए जब तक यह तय नहीं हो जाता कि मूल पार्टी के नाम और चिह्न पर दावा किसका है, दोनों गुट इनका इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
घटनाक्रम क्या है?
विवाद के बीच चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी किया। आयोग ने दोनों गुटों से अलग नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प मांगे, ताकि आने वाले उपचुनावों में दोनों की अलग पहचान हो सके।
18 सितंबर को आयोग ने ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया और अरूप रॉय के गुट को डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस नाम और ‘लिफाफा’ चिह्न दिया गया। यह भी ध्यान में रखने की बात है कि यह व्यवस्था फिलहाल उपचुनावों के लिए है; मूल नाम और चिह्न को लेकर अंतिम फैसला बाद में होना है।
क्यों महत्वपूर्ण है?
इस विवाद का सीधा असर चुनाव में पार्टी की पहचान पर पड़ता है। तृणमूल कांग्रेस का नाम और ‘जोड़ाफूल’ चिह्न लंबे समय से उसकी चुनावी पहचान का हिस्सा रहे हैं। अब दोनों गुटों को अलग नाम और चिह्न के साथ चुनाव मैदान में उतरना होगा।
मामला ऐसे समय सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है जब पश्चिम बंगाल में उपचुनाव होने वाले हैं। इसलिए अदालत में होने वाली सुनवाई से यह साफ हो सकता है कि चुनाव आयोग का अंतरिम फैसला आगे किस तरह लागू रहेगा और मूल नाम-चिह्न पर दावे की प्रक्रिया किस दिशा में जाएगी।
स्रोत: Election Commission of India, Times of India, The Indian Express, India Today, Hindustan Times
