न पढ़ाई, न रोजगार, 250 जिलों में युवाओं का क्या हाल?

PLFS की जिला-स्तरीय रिपोर्ट के मुताबिक करीब 250 जिलों में 15-29 वर्ष के 25% से ज्यादा युवा न रोजगार में हैं, न शिक्षा या प्रशिक्षण में। NEET आंकड़ों में क्षेत्रीय और लैंगिक अंतर भी सामने आए।

संपादकीय सार (मुख्य बिंदु)Key Facts

  • १.देश के करीब 250 जिलों में 15-29 वर्ष के 25% से अधिक युवा NEET श्रेणी में हैं।
  • २.PLFS की जिला-स्तरीय रिपोर्ट सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा 18 सितंबर 2026 को जारी की गई।
  • ३.बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और पश्चिम बंगाल में लगभग दो-तिहाई जिलों में एक चौथाई युवा NEET हैं।
  • ४.सर्वेक्षण किए गए तीन-चौथाई जिलों में युवतियों की NEET दर 25% से अधिक पाई गई।
  • ५.ओडिशा के नबरंगपुर में NEET दर सबसे कम (4.1%) दर्ज की गई।
न पढ़ाई, न रोजगार, 250 जिलों में युवाओं का क्या हाल?
तस्वीर साभार: संपादकीय अपलोड

देश के करीब 250 जिलों में 15 से 29 वर्ष की उम्र के 25 प्रतिशत से ज्यादा युवा NEET श्रेणी में हैं। यानी ये युवा न रोजगार में हैं, न शिक्षा ले रहे हैं और न ही किसी तरह के प्रशिक्षण से जुड़े हैं। यह तस्वीर 2025 के जिला-स्तरीय आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण यानी PLFS में सामने आई है, जिसे सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 18 सितंबर 2026 को जारी किया।

यह पहली बार है जब PLFS के जरिए जिला स्तर पर युवाओं की रोजगार, शिक्षा और प्रशिक्षण से जुड़ी स्थिति को इतने व्यापक स्तर पर देखा गया है। मंत्रालय की रिपोर्ट में देश के बड़े राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के करीब 600 जिलों को शामिल किया गया है। कुछ मामलों में आसपास के जिलों को एक साथ मिलाकर सर्वेक्षण इकाई माना गया है।

सबसे पहले NEET को समझना जरूरी है। NEET का अर्थ है Not in Employment, Education or Training, यानी ऐसे युवा जो रोजगार, शिक्षा या प्रशिक्षण में नहीं हैं। लेकिन NEET को सीधे बेरोजगारी मानना सही नहीं होगा। इस श्रेणी में ऐसे लोग भी शामिल हो सकते हैं जो घरेलू या देखभाल के बिना भुगतान वाले काम में लगे हैं, नौकरी की तलाश छोड़ चुके हैं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं या किसी अन्य वजह से शिक्षा और रोजगार से बाहर हैं।

जिला स्तर पर तस्वीर हर जगह एक जैसी नहीं है। बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और पश्चिम बंगाल में करीब दो-तिहाई जिलों में लगभग एक चौथाई युवा NEET श्रेणी में हैं। वहीं आंध्र प्रदेश, ओडिशा, असम और तेलंगाना के करीब आधे जिलों में 25 प्रतिशत युवा इस श्रेणी में आते हैं।

दूसरी तरफ कुछ जिलों में स्थिति इससे काफी अलग दिखाई देती है। करीब 25 जिलों में NEET का अनुपात 10 प्रतिशत से कम दर्ज किया गया। इनमें छत्तीसगढ़ के कबीरधाम, राजनांदगांव और उत्तर बस्तर कांकेर, हिमाचल प्रदेश का चंबा, केरल का एर्नाकुलम और मध्य प्रदेश का मंडला शामिल हैं। ओडिशा के नबरंगपुर में NEET दर 4.1 प्रतिशत दर्ज की गई, जो रिपोर्ट में बताए गए जिलों में सबसे कम है।

इस आंकड़े का एक और महत्वपूर्ण पहलू युवतियों की स्थिति है। सर्वेक्षण किए गए करीब तीन-चौथाई जिलों में 15 से 29 वर्ष की युवतियों की NEET दर 25 प्रतिशत से ज्यादा रही। रिपोर्ट से जुड़े विश्लेषण में घरेलू और देखभाल के बिना भुगतान वाले काम तथा सामाजिक अपेक्षाओं को इसकी संभावित वजहों में शामिल किया गया है। कुछ युवा उपयुक्त नौकरी नहीं मिलने के कारण श्रम बाजार से बाहर हो सकते हैं, जबकि कुछ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान रोजगार और औपचारिक प्रशिक्षण दोनों से बाहर रहते हैं।

इन आंकड़ों से एक बात साफ होती है कि युवाओं की स्थिति को सिर्फ देश या राज्य के औसत से समझना मुश्किल है। एक ही राज्य के अलग-अलग जिलों में NEET युवाओं का अनुपात काफी अलग हो सकता है। इसलिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कितने युवा शिक्षा और रोजगार से बाहर हैं, बल्कि यह भी है कि वे किन परिस्थितियों में बाहर हैं और अलग-अलग जिलों में इसके पीछे क्या कारण हैं।

PLFS का यह जिला-स्तरीय आंकड़ा अब सरकारों के सामने एक और सवाल रखता है। क्या युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल और रोजगार की नीतियां स्थानीय जरूरतों के हिसाब से बनाई जा रही हैं, और क्या उन जिलों की पहचान हो रही है जहां युवाओं को शिक्षा से रोजगार तक पहुंचाने के लिए ज्यादा लक्षित प्रयास की जरूरत है?

स्रोत: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, PLFS 2025; जिला-स्तरीय श्रम बाजार रिपोर्ट, 18 सितंबर 2026.