IIT बॉम्बे में छात्र की मौत के बाद FIR, प्रोफेसर पर प्रताड़ना और जातिगत टिप्पणी के आरोप
आईआईटी बॉम्बे में छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद विवाद बढ़ गया है। परिवार ने एक प्रोफेसर पर प्रताड़ना और जातिसूचक टिप्पणी के साथ जान देने के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है।
संपादकीय सार (मुख्य बिंदु)Key Facts
- १.आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद उनके परिवार ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला पर प्रताड़ना और जातिसूचक टिप्पणी का आरोप लगाया है।
- २.पवई पुलिस ने प्रोफेसर के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।
- ३.यह आईआईटी बॉम्बे में किसी प्रोफेसर के खिलाफ ऐसा पहला मामला बताया जा रहा है, और इस साल कैंपस में छात्र की मौत की यह तीसरी घटना है।
- ४.साहिल को परीक्षा के दौरान ChatGPT का उपयोग करते हुए पकड़ा गया था, जिसके बाद उसी शाम उन्होंने अपने हॉस्टल के कमरे में जान दे दी।
- ५.आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने जातिगत भेदभाव के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि छात्र की जाति से जुड़ी जानकारी साझा नहीं की जाती और साहिल के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई थी।

आईआईटी बॉम्बे में 20 वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद मामला पुलिस जांच तक पहुंच गया है। साहिल के परिवार ने संस्थान के प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला समेत कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि साहिल को लंबे समय से प्रताड़ित किया जा रहा था और उसके साथ जाति को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। शिकायत मिलने के बाद पवई पुलिस ने जान देने के लिए उकसाने और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। बाद में जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई।
साहिल एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में दूसरे वर्ष के बीटेक छात्र थे। 18 सितंबर को दोपहर करीब 2 से 4 बजे के बीच हुई परीक्षा में उन्हें मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़े जाने की बात संस्थान ने कही है। आईआईटी बॉम्बे के मुताबिक, छात्र ने परीक्षा का प्रश्नपत्र AI प्लेटफॉर्म पर डालकर जवाब हासिल करने की कोशिश की थी। इसके कुछ घंटे बाद वह अपने हॉस्टल के कमरे में मृत मिले।
यहीं से मामले की दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आती हैं। परिवार और प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि साहिल पर निलंबन की कार्रवाई का दबाव बनाया गया था। परिवार ने प्रोफेसर पर जातिसूचक टिप्पणियां करने और मानसिक रूप से परेशान करने का भी आरोप लगाया है। दूसरी तरफ, आईआईटी बॉम्बे का कहना है कि साहिल के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू ही नहीं की गई थी। संस्थान के अनुसार, शिक्षक और विभागाध्यक्ष ने उनसे बात की थी और उन्हें बताया गया था कि परीक्षा से जुड़ी घटना का उनके अकादमिक भविष्य पर असर नहीं पड़ेगा।
एफआईआर में नामजद प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला एनर्जी साइंस विभाग से जुड़े हैं और परीक्षा के दौरान निरीक्षक की भूमिका में थे। वह इससे पहले आईआईटी बॉम्बे में डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। परिवार की शिकायत में अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का भी उल्लेख है। पुलिस ने फिलहाल आरोपों के आधार पर मामला दर्ज किया है, जबकि इन आरोपों की जांच जारी है।
जातिगत भेदभाव के आरोपों पर आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे ने असहमति जताई है। उनका कहना है कि संस्थान में छात्रों की जाति से जुड़ी जानकारी सामान्य प्रशासनिक या अकादमिक कामकाज में उपलब्ध नहीं रहती और उन्होंने कैंपस में जातिगत भेदभाव के आरोप को खारिज किया है। संस्थान ने पुलिस जांच में सहयोग करने की बात भी कही है।
साहिल की मौत के बाद कैंपस में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। यह इस साल आईआईटी बॉम्बे परिसर में छात्र की जान जाने की तीसरी घटना बताई गई है। इसी वजह से छात्रों की ओर से संस्थान में छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
मामले में परिवार ने कार्रवाई की मांग को लेकर शव लेने से भी इनकार कर दिया था। उनके पिता रविंद्र ने कहा था कि आरोपियों की गिरफ्तारी तक वह अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। करीब सात घंटे तक चले इस गतिरोध के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने परिवार को जांच का भरोसा दिया और केस क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने की जानकारी दी गई। इसके बाद परिवार ने शव स्वीकार किया।
अब जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि परीक्षा के बाद साहिल के साथ वास्तव में क्या बातचीत हुई थी, परिवार द्वारा लगाए गए प्रताड़ना और जातिगत टिप्पणी के आरोपों के पीछे क्या तथ्य हैं और उस दिन की घटनाओं का उनकी मौत से क्या संबंध था। फिलहाल पुलिस जांच जारी है, इसलिए इन आरोपों को जांच के निष्कर्ष से पहले स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।
