समस्तीपुर में जमुई जैसी घटना: ‘मोरल पुलिसिंग’ के नाम पर बच्ची से बदसलूकी का आरोप, 4 गिरफ्तार

जमुई कांड के बाद बिहार से सामने आया दूसरा वीडियो, कर्पूरीग्राम के जगतसिंहपुर में लड़की को घेरकर बदसलूकी का आरोप

संपादकीय सार (मुख्य बिंदु)Key Facts

  • १.समस्तीपुर के कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र के जगतसिंहपुर गांव में घटना हुई।
  • २.एक वायरल वीडियो में लड़की से बदसलूकी करते युवक दिखाई दे रहे हैं।
  • ३.पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
  • ४.यह घटना जमुई में हुई इसी तरह की 'मोरल पुलिसिंग' की घटना के बाद सामने आई है।
  • ५.पुलिस ने पीड़िता की पहचान उजागर न करने की अपील की है और BNS, POCSO, IT Act के तहत कार्रवाई की है।
समस्तीपुर में जमुई जैसी घटना: ‘मोरल पुलिसिंग’ के नाम पर बच्ची से बदसलूकी का आरोप, 4 गिरफ्तार
तस्वीर साभार: संपादकीय अपलोड (AI Generated)

बिहार के समस्तीपुर से सामने आए एक नए वायरल वीडियो ने जमुई की घटना के बाद एक बार फिर नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा और तथाकथित ‘मोरल पुलिसिंग’ पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र के जगतसिंहपुर गांव के बांध-बाइपास रोड का बताया जा रहा वीडियो 23 सितंबर की शाम सोशल मीडिया पर सामने आया। वीडियो में एक लड़की को कुछ युवक घेरते और उसके साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार करते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी है।

वीडियो में क्या दिखाई दे रहा है?

पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक लड़की एक युवक के साथ वहां पहुंची थी और सड़क किनारे रुकी थी। इसी दौरान कुछ युवक वहां पहुंचे। आरोप है कि पहले लड़की के साथ मौजूद युवक को पीटा गया, जिसके बाद वह वहां से चला गया। इसके बाद लड़की को समूह ने घेर लिया।

वायरल वीडियो में लड़की को वहां से जाने की कोशिश करते देखा जा सकता है। विडिओ में हाथ पकड़ने, खींचने, गाली-गलौज और कथित ‘बैड टच’ जैसी हरकतों का साफ देखा जा सकता है। वीडियो में मौजूद कुछ लोगों पर घटना को रोकने के बजाय उसे रिकॉर्ड करने के भी आरोप हैं।

यहां एक जरूरी बात यह है कि वीडियो के आधार पर सामने आए आरोपों की पूरी कानूनी पुष्टि जांच के बाद ही होगी। पुलिस घटना की परिस्थितियों और वीडियो में मौजूद सभी लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

पुलिस ने क्या किया?

वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद समस्तीपुर पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया। पुलिस के मुताबिक तकनीकी जांच से घटनास्थल की पहचान कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र में हुई और प्राथमिकी दर्ज की गई। ताजा रिपोर्टों के अनुसार चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मामले में BNS, POCSO और IT Act की प्रासंगिक धाराओं के तहत कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।

पुलिस ने लोगों से अपील भी की है कि पीड़िता की पहचान उजागर करने वाला वीडियो, फोटो या अन्य सामग्री सोशल मीडिया पर साझा न करें।

जमुई के बाद समस्तीपुर—क्यों जुड़ रहा है दोनों मामलों को?

समस्तीपुर का यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब जमुई में 19 सितंबर की घटना को लेकर पूरे बिहार में बहस चल रही है। जमुई में एक नाबालिग छात्रा और उसके सहपाठी को युवकों के समूह द्वारा रोके जाने, मारपीट और छात्रा के साथ कथित बदसलूकी का वीडियो वायरल हुआ था। उस मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर POCSO के तहत कार्रवाई की, SIT बनाई और गिरफ्तारियां कीं।

दोनों मामलों को जोड़ने वाली सबसे बड़ी बात यह है कि दोनों में युवाओं के एक समूह द्वारा एक लड़की को घेरने और घटना का वीडियो बनाए जाने का आरोप है। हालांकि दोनों मामलों की परिस्थितियां और जांच अलग-अलग हैं, इसलिए इन्हें कानूनी तौर पर एक जैसा मामला मानना जल्दबाजी होगी।

CM सम्राट चौधरी ने जमुई पर क्या कहा था?

जमुई मामले के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 22 सितंबर को एक कार्यक्रम में अपराधियों को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर बात करते हुए कहा था कि अपराधी पुलिस को चुनौती देंगे तो “24 घंटे के अंदर जवाब मिलेगा।”

उन्होंने जमुई मामले में वायरल हुई रील का जिक्र करते हुए कहा था कि आजकल लोग ‘रील हीरो’ बनने के चक्कर में आपराधिक घटनाओं के वीडियो बनाते हैं और सवाल उठाया था कि “अगर आरोपी ने रील नहीं बनाई होती तो वह पकड़ा जाता?”उन्होंने यह भी कहा कि आपराधिक घटना करके कोई समाज का हीरो नहीं बन सकता।

यहाँ मुख्यमंत्री के बयान को भी उसी कसौटी पर देखना होगा। अगर वीडियो बनने के कारण आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी आसान हुई, तो यह पुलिस कार्रवाई का एक पहलू है। लेकिन क्या महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा का मूल्यांकन सिर्फ घटना के बाद हुई गिरफ्तारी से किया जाना चाहिए? या फिर यह भी देखा जाना चाहिए कि ऐसी घटनाएं सार्वजनिक जगहों पर दोबारा क्यों हो रही हैं?

मंत्री श्रेयसी सिंह का ‘मोरल पुलिसिंग’ वाला बयान भी चर्चा में

जमुई मामले के बाद बिहार की मंत्री और जमुई विधायक श्रेयसी सिंह के एक बयान पर भी विवाद हुआ था। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने एक बातचीत में कहा था कि “मोरल पुलिसिंग को सभ्य और शालीन तरीके से किया जा सकता है।” इस बयान को लेकर आलोचना हुई और इसे जमुई की घटना के संदर्भ में देखा गया।

यही वजह है कि समस्तीपुर के नए वीडियो के बाद ‘मोरल पुलिसिंग’ शब्द एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में आ गया है।

सवाल अब सिर्फ एक वायरल वीडियो का नहीं

समस्तीपुर की घटना में एक बुनियादी सवाल यह है कि किसी लड़की या लड़के की निजी जिंदगी, दोस्ती या कहीं आने-जाने पर आपत्ति होने की स्थिति में क्या किसी समूह को उसे सड़क पर रोकने, पूछताछ करने, घेरने या उसके साथ शारीरिक दुर्व्यवहार करने का अधिकार है?

कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी पुलिस और वैधानिक संस्थाओं की है। किसी नागरिक समूह द्वारा खुद सजा देने या सार्वजनिक रूप से अपमानित करने की कोशिश अलग सवाल खड़ा करती है।

जमुई और अब समस्तीपुर—दोनों मामलों में वीडियो सामने आने के बाद पुलिस कार्रवाई हुई है। लेकिन इन घटनाओं से जुड़ी सबसे संवेदनशील बात यह भी है कि घटना का वीडियो खुद पीड़िता की निजता के लिए खतरा बन सकता है।

जमुई में ‘मोरल पुलिसिंग’ को लेकर उठे सवालों और उस पर आए राजनीतिक बयानों के बीच अब समस्तीपुर से भी एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसमें एक लड़की को युवकों के समूह द्वारा घेरकर कथित तौर पर बदसलूकी किए जाने का आरोप है। पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। अब जांच यह तय करेगी कि वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की भूमिका क्या थी और किन धाराओं में कार्रवाई बनती है।