ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं 7 शर्तें, तीन ही हुईं सार्वजनिक, ट्रंप के जवाब का इंतजार
ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए 7 शर्तें कतर के जरिए वॉशिंगटन तक पहुंचाई हैं। इनमें युद्ध रोकना, ईरान के फ्रीज फंड जारी करना और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना शामिल है। बाकी चार शर्तें सार्वजनिक नहीं की गई हैं।
संपादकीय सार (मुख्य बिंदु)Key Facts
- १.ईरान ने अमेरिका से बातचीत के लिए 7 शर्तें रखी हैं, जिनमें से 3 सार्वजनिक हुई हैं।
- २.सार्वजनिक शर्तों में व्यापक युद्धविराम, फ्रीज किए गए ईरानी फंड की वापसी और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना शामिल है।
- ३.कतर दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और उसने ये शर्तें अमेरिका तक पहुंचाई हैं।
- ४.ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि शर्तें स्वीकार नहीं की गईं तो वह संघर्ष को निर्णायक दौर तक ले जाने को तैयार है।
- ५.पाकिस्तान भी अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता का प्रयास कर रहा है।

अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत का रास्ता एक बार फिर खुलता दिख रहा है, लेकिन तेहरान ने इसके लिए अपनी शर्तें तय कर दी हैं। ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई के मुताबिक, कतर ने ईरान की सात शर्तें अमेरिका तक पहुंचा दी हैं। अब तेहरान में डोनाल्ड ट्रंप के जवाब का इंतजार किया जा रहा है।
रेजाई ने अल जजीरा से बातचीत में कहा कि कतर लगातार दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अमेरिका ईरान की शर्तों को स्वीकार नहीं करता है तो उनका देश संघर्ष को निर्णायक दौर तक ले जाने के लिए तैयार है। हालांकि, ईरान ने सातों शर्तों का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया है। अभी तीन प्रमुख मांगों की जानकारी सामने आई है।
कौन-सी तीन शर्तें हैं जो ईरान की ओर से सामने आईं?
पहली मांग है कि सभी मोर्चों पर चल रही लड़ाई को खत्म किया जाए। ईरान बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए व्यापक युद्धविराम चाहता है।
दूसरी मांग अमेरिका में रोकी गई ईरानी संपत्तियों और धन को जारी करने की है। ईरान चाहता है कि उसके फ्रीज किए गए फंड वापस किए जाएं।
तीसरी मांग अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने की है। रेजाई ने इन तीनों मांगों को बातचीत की दिशा में आगे बढ़ने के लिए अहम शर्तों के तौर पर बताया है। बाकी चार शर्तों को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
रेजाई ट्रंप पर क्या बोले?
मोहसिन रेजाई ने कहा कि अमेरिका के लिए ईरान की शर्तों को स्वीकार करना उसके अपने हित में है। उन्होंने ट्रंप की धमकियों को लेकर कहा कि इससे कोई परिणाम हासिल नहीं होगा और ईरान निर्णायक युद्ध के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि तेहरान को अमेरिकी हमले की एक और संभावना दिखाई दे रही है और उसने उसके लिए अपनी सैन्य तैयारी में बदलाव किए हैं।
परमाणु नीति को लेकर भी रेजाई ने संकेत दिया कि अमेरिकी कार्रवाई का असर ईरान के भविष्य के फैसलों पर पड़ सकता है। हालांकि, मौजूदा रिपोर्टों में यह साफ है कि ईरान ने अभी परमाणु अप्रसार संधि से बाहर निकलने का फैसला घोषित नहीं किया है।
कतर और पाकिस्तान क्यों अहम हैं?
अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत बहाल कराने की कोशिशों में कतर के साथ पाकिस्तान भी मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। दोनों देशों के बीच पहले हुए समझौते की अवधि अगस्त में बिना किसी स्थायी समाधान के खत्म हो गई थी। इसके बाद मध्यस्थ देशों की कोशिशें फिर तेज हुई हैं।
कतर ने ईरान की नई शर्तें अमेरिका तक पहुंचा दी हैं, जबकि पाकिस्तान भी बातचीत का रास्ता खोलने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी के तेहरान दौरे की भी जानकारी सामने आई है।
फिलहाल गेंद अमेरिका के पाले में है। ईरान ने बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया है, लेकिन उसने साफ कर दिया है कि आगे की बातचीत उसकी तय शर्तों के आधार पर होगी। दूसरी तरफ, अमेरिका की ओर से इन शर्तों पर क्या जवाब आता है, यह तय करेगा कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत आगे बढ़ती है या संघर्ष फिर तेज होता है।
