भारत का P4M में प्रवेश: क्या UNSC सुधार की मुहिम को मिलेगा नया मंच?

भारत ने P4M बहुपक्षीय समूह की पहल में अहम भूमिका निभाई है। मंच का फोकस वैश्विक संस्थाओं में सुधार और बहुपक्षवाद मजबूत करना है, जिससे UNSC सुधार की भारत की मुहिम को नया मंच मिल सकता है।

संपादकीय सार (मुख्य बिंदु)Key Facts

  • १.P4M का पहला शिखर सम्मेलन न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुआ, जिसकी सह-अध्यक्षता विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने की।
  • २.भारत, यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, बारबाडोस, ब्राजील, कनाडा और केन्या P4M के शुरुआती सह-प्रायोजक हैं।
  • ३.P4M का उद्देश्य वैश्विक संस्थाओं को अधिक प्रतिनिधिक, प्रभावी और भरोसेमंद बनाना है।
  • ४.यह मंच भारत को UNSC सुधार की अपनी प्राथमिकताओं को विभिन्न देशों के साथ आगे बढ़ाने का अवसर देता है।
  • ५.P4M भारत की 'Strategic Autonomy' की नीति के अनुरूप है, जो विभिन्न मुद्दों पर अलग-अलग साझेदारियों को बढ़ावा देती है।
भारत का P4M में प्रवेश: क्या UNSC सुधार की मुहिम को मिलेगा नया मंच?
तस्वीर साभार: संपादकीय अपलोड

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता की अपनी लंबे समय से चली आ रही मांग के बीच भारत ने एक नए बहुपक्षीय मंच Partners for Multilateralism, International Law, Peace and Prosperity (P4M) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 21 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुए पहले P4M शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने की। भारत इस पहल के शुरुआती सह-प्रायोजकों में शामिल है।

P4M में भारत के साथ यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, बारबाडोस, ब्राजील, कनाडा और केन्या शुरुआती सह-प्रायोजक हैं। इसके अलावा कई अन्य देशों और संगठनों ने घोषणा पर हस्ताक्षर किए हैं। यूरोपीय परिषद की आधिकारिक घोषणा के अनुसार, मंच का उद्देश्य बहुपक्षवाद, अंतरराष्ट्रीय कानून, शांति और समृद्धि को मजबूत करना है।

P4M आखिर है क्या?

P4M को किसी सैन्य गठबंधन या पारंपरिक राजनीतिक ब्लॉक के रूप में पेश नहीं किया गया है। यह अलग-अलग क्षेत्रों के देशों को एक साथ लाने वाला बहुपक्षीय मंच है, जिसका जोर वैश्विक संस्थाओं को अधिक प्रतिनिधिक, प्रभावी और भरोसेमंद बनाने पर है।

P4M की घोषणा में वैश्विक ध्रुवीकरण, संघर्ष, अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन, संरक्षणवाद, आर्थिक दबाव और सप्लाई चेन में व्यवधान जैसी चुनौतियों को रेखांकित किया गया है। मंच जलवायु, व्यापार, विकास वित्त, नई तकनीक और वैश्विक शासन जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की बात करता है।

भारत के लिए UNSC क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है। मौजूदा UNSC में 15 सदस्य हैं, जिनमें चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका पांच स्थायी सदस्य हैं और उनके पास वीटो अधिकार है। भारत का तर्क रहा है कि आज की वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र की निर्णय लेने वाली संस्थाओं में व्यापक प्रतिनिधित्व होना चाहिए।

P4M का आधिकारिक घोषणापत्र सीधे किसी देश को UNSC की स्थायी सीट देने का वादा नहीं करता। लेकिन संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार इस पहल के प्रमुख विषयों में शामिल है। इसलिए भारत के लिए यह मंच अपनी सुधार संबंधी प्राथमिकताओं को अलग-अलग क्षेत्रों के देशों के साथ आगे बढ़ाने का एक अतिरिक्त कूटनीतिक माध्यम बन सकता है।

क्या P4M से भारत की स्थायी सीट का रास्ता साफ होगा?

यह कहना अभी जल्दबाजी होगी।

P4M में शामिल होना भारत को उन देशों के साथ काम करने का मंच देता है जो बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और अधिक प्रतिनिधित्व की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं। लेकिन UNSC की संरचना में बदलाव के लिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति और संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के बीच औपचारिक प्रक्रिया की आवश्यकता होगी।

दूसरे शब्दों में, P4M को भारत की UNSC सदस्यता का सीधा रास्ता नहीं, बल्कि उस व्यापक कूटनीतिक प्रयास का एक अतिरिक्त मंच समझना अधिक सटीक होगा।

South China Morning Post ने भी विश्लेषकों के हवाले से कहा है कि इस समूह की वास्तविक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह शुरुआती दौर में जलवायु या संयुक्त राष्ट्र सुधार जैसे मुद्दों पर ठोस परिणाम हासिल कर पाता है या नहीं।

जयशंकर ने क्या कहा?

P4M सम्मेलन में एस. जयशंकर ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था दबाव में है और लंबे समय से चल रहे शक्ति-संतुलन के बदलाव को बढ़ती प्रतिस्पर्धा, भू-राजनीतिक तनाव और संघर्षों ने और जटिल बना दिया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नियमों और बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

भारत के लिए इसका एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि P4M किसी एक महाशक्ति के नेतृत्व वाले गठबंधन के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों और रणनीतिक परिस्थितियों वाले देशों को साथ लाने की कोशिश करता है।

भारत की ‘Strategic Autonomy’ को भी नया मंच

P4M का भौगोलिक स्वरूप काफी विविध है। इसमें यूरोप, एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और प्रशांत क्षेत्र से जुड़े देश शामिल हैं। इससे भारत को अमेरिका या चीन जैसे किसी एक शक्ति-केंद्र पर निर्भर हुए बिना अलग-अलग मुद्दों पर अलग-अलग साझेदारों के साथ काम करने की गुंजाइश मिलती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह भारत की strategic autonomy की उस नीति के अनुरूप है जिसमें नई दिल्ली अलग-अलग मुद्दों पर अलग-अलग साझेदारियों को आगे बढ़ाती है।

भारत पहले से ही G20, BRICS और अन्य बहुपक्षीय मंचों में सक्रिय है। P4M इस नेटवर्क में एक और मंच जोड़ता है, लेकिन इसकी खासियत यह है कि इसका फोकस विशेष रूप से बहुपक्षीय व्यवस्था और उसके सुधार पर है।

आगे की असली परीक्षा क्या होगी?

P4M की घोषणा और भारत की भागीदारी अपने आप में UNSC सुधार सुनिश्चित नहीं करती। इसकी प्रभावशीलता इस बात से तय होगी कि सदस्य देश साझा घोषणाओं से आगे बढ़कर कितने ठोस कदम उठाते हैं।

UN सुधार, जलवायु कार्रवाई, विकास वित्त, सप्लाई चेन, नई तकनीक और अंतरराष्ट्रीय कानून जैसे मुद्दों पर यदि P4M लगातार संयुक्त पहल कर पाता है, तो यह मंच समय के साथ अधिक प्रभावशाली हो सकता है। दूसरी ओर, यदि सहयोग केवल बैठकों और घोषणाओं तक सीमित रहता है, तो इसका प्रभाव सीमित रह सकता है। यही कारण है कि कुछ विश्लेषकों ने शुरुआती ठोस उपलब्धियों को इस मंच के लिए महत्वपूर्ण माना है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि P4M भारत को वैश्विक संस्थाओं में सुधार की अपनी बात रखने के लिए एक नया बहुपक्षीय मंच देता है। लेकिन UNSC की स्थायी सदस्यता तक पहुंचने में P4M की वास्तविक भूमिका आने वाले वर्षों में उसके काम और सदस्य देशों के बीच बनने वाली सहमति से ही तय होगी।

प्रामाणिक तथ्य एवं स्रोत संदर्भ (Verified Sources)