सिंधु जल विवाद फिर पहुंचा UN: पाकिस्तान की चिट्ठी पर भारत ने क्या कहा, जानिए पूरा मामला—

पाकिस्तान ने मध्यस्थता फैसले का हवाला दिया, भारत ने प्रक्रिया को ही बताया अवैध; आतंकवाद बंद होने तक संधि स्थगित रखने के रुख पर कायम भारत।

संपादकीय सार (मुख्य बिंदु)Key Facts

  • १.पाकिस्तान ने Court of Arbitration के फैसले का हवाला देते हुए UN में पत्र प्रसारित किया है।
  • २.भारत ने पाकिस्तान के दावे को खारिज किया और मध्यस्थता प्रक्रिया को अवैध बताया है।
  • ३.भारत ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद संधि को स्थगित रखने की घोषणा की थी।
  • ४.सिंधु जल संधि 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई थी।
  • ५.भारत का रुख है कि आतंकवाद बंद होने तक संधि स्थगित रहेगी।
सिंधु जल विवाद फिर पहुंचा UN: पाकिस्तान की चिट्ठी पर भारत ने क्या कहा, जानिए पूरा मामला—
तस्वीर साभार: संपादकीय अपलोड

नई दिल्ली, 23 सितंबर 2026: भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर विवाद एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद तक पहुंच गया है। पाकिस्तान ने हाल में Court of Arbitration के एक फैसले को लेकर UNSC में पत्र प्रसारित किया और दावा किया कि फैसले ने उसकी इस स्थिति की पुष्टि की है कि भारत एकतरफा तरीके से संधि को स्थगित नहीं कर सकता। भारत ने 22 सितंबर को पाकिस्तान के इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि नई दिल्ली उस मध्यस्थता प्रक्रिया और उसके फैसलों को मान्यता नहीं देती।

पाकिस्तान ने UN को क्या बताया?

विवाद की ताजा कड़ी अगस्त के आखिर में आए Court of Arbitration के फैसले से जुड़ी है। अदालत ने कहा था कि भारत द्वारा संधि को abeyance यानी स्थगित रखने का फैसला संधि के तहत स्वीकार्य नहीं है और उसके अनुसार Indus Waters Treaty लागू बनी हुई है। पाकिस्तान ने इस फैसले को अपनी कानूनी स्थिति की पुष्टि के रूप में पेश किया है।

पाकिस्तान का तर्क है कि सिंधु नदी प्रणाली उसके कृषि क्षेत्र, खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस्लामाबाद का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों और संधि में निर्धारित dispute-resolution mechanism का पालन होना चाहिए। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सितंबर की शुरुआत में भी कहा था कि भारत अपनी संधि संबंधी जिम्मेदारियों से एकतरफा पीछे नहीं हट सकता।

भारत ने दिया जवाब?

भारत ने पाकिस्तान की UN वाली चिट्ठी पर कड़ी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 22 सितंबर को कहा कि पाकिस्तान तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर रहा है। भारत का कहना है कि जिस निकाय के फैसले को पाकिस्तान “Permanent Court of Arbitration” के निर्णय के रूप में पेश कर रहा है, उसकी कार्यवाही को नई दिल्ली वैध नहीं मानती। भारत इन proceedings में शामिल भी नहीं हुआ था।

भारत की मौजूदा स्थिति यह है कि सिंधु जल संधि तब तक स्थगित रहेगी जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय तरीके से समर्थन देना बंद नहीं करता। भारत ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद संधि को स्थगित रखने की घोषणा की थी। नई दिल्ली का तर्क है कि आपसी विश्वास और सद्भाव पर आधारित सहयोग उस स्थिति में जारी नहीं रह सकता जब सीमा पार आतंकवाद बना रहे।

असली कानूनी विवाद क्या है?

यह मामला केवल पानी के बंटवारे का नहीं है। दोनों देशों के बीच इस बात पर भी मूलभूत मतभेद है कि विवाद का फैसला करने का अधिकार किस संस्था के पास है।

पाकिस्तान Court of Arbitration की प्रक्रिया को संधि के तहत वैध मानता है। भारत का कहना है कि इस मामले में एक साथ अलग-अलग dispute-resolution प्रक्रियाएं शुरू करना संधि के अनुरूप नहीं था और वह Court of Arbitration की jurisdiction को स्वीकार नहीं करता। यही वजह है कि एक ही फैसले को पाकिस्तान अपने पक्ष में महत्वपूर्ण कानूनी निर्णय बता रहा है, जबकि भारत उस प्रक्रिया की वैधता ही खारिज कर रहा है।

सिंधु जल संधि में किसे कौन-सी नदियां मिलीं?

1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई सिंधु जल संधि के तहत रावी, ब्यास और सतलुज जैसी पूर्वी नदियों का पानी मुख्य रूप से भारत के उपयोग के लिए रखा गया, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी पश्चिमी नदियों का अधिकांश पानी पाकिस्तान के लिए निर्धारित हुआ। भारत को पश्चिमी नदियों पर कुछ घरेलू, कृषि और जलविद्युत उपयोग की अनुमति भी है।

दशकों तक भारत-पाकिस्तान के युद्ध और राजनीतिक तनाव के बावजूद यह संधि कायम रही। इसलिए अप्रैल 2025 में भारत द्वारा इसे स्थगित करने का निर्णय दोनों देशों के जल संबंधों में बड़ा बदलाव था।

आगे क्या?

फिलहाल दोनों देशों की स्थिति एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों और मध्यस्थता प्रक्रिया के जरिए भारत पर संधि लागू करने का दबाव बढ़ा रहा है। भारत इसे सीमा पार आतंकवाद और द्विपक्षीय संबंधों से जोड़ते हुए अपनी मौजूदा नीति बदलने के संकेत नहीं दे रहा।

इसलिए UN को लिखी गई पाकिस्तान की चिट्ठी से तत्काल पानी के बंटवारे की स्थिति बदलने की बजाय विवाद का कूटनीतिक और कानूनी मोर्चा और तेज हुआ है। आने वाले समय में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह रहेगा कि क्या दोनों देश संधि के भीतर किसी स्वीकार्य वार्ता या dispute-resolution mechanism पर लौटते हैं, या सिंधु का पानी भारत-पाकिस्तान संबंधों में लंबे समय तक एक अलग टकराव का मुद्दा बना रहता है।