ट्रंप बोले- दूसरे मीडिया संस्थानों को भी व्हाइट हाउस से बाहर कर सकता हूं, CNN समेत 3 पर रोक

ट्रंप ने CNN, MS NOW और Politico को व्हाइट हाउस से बाहर करने का ऐलान किया और दूसरे मीडिया संस्थानों पर भी कार्रवाई के संकेत दिए।

संपादकीय सार (मुख्य बिंदु)Key Facts

  • १.ट्रंप ने CNN, MS NOW और Politico को 'फेक न्यूज' के आरोप में व्हाइट हाउस से बाहर करने की घोषणा की।
  • २.उन्होंने अन्य मीडिया संस्थानों पर भी इसी तरह की कार्रवाई के संकेत दिए।
  • ३.अमेरिकी संविधान का पहला संशोधन प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करता है।
  • ४.व्हाइट हाउस संवाददाता संघ और अन्य प्रेस स्वतंत्रता संगठनों ने इस कदम का विरोध किया है।
  • ५.यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप और मीडिया के बीच ऐसा विवाद हुआ है; पहले CNN के पत्रकार जिम एकोस्टा की मान्यता रद्द की गई थी।
ट्रंप बोले- दूसरे मीडिया संस्थानों को भी व्हाइट हाउस से बाहर कर सकता हूं, CNN समेत 3 पर रोक
तस्वीर साभार: एडिटर डेस्क (AI जनरेटेड )

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर को CNN, MS NOW और Politico को व्हाइट हाउस से बाहर करने का ऐलान किया। वजह बताई गई - ‘फेक न्यूज’। यानी खबर अगर राष्ट्रपति की पसंद की नहीं है, तो अब खबर से पहले प्रवेश-पास की चिंता करनी पड़ सकती है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि दूसरे मीडिया संस्थानों की बारी आ सकती है। 

ट्रंप ने क्या कहा?

ट्रंप ने Truth Social पर लिखा कि ये मीडिया संस्थान उनके प्रशासन और अमेरिका को लेकर “फिक्शन और झूठ” प्रकाशित कर रहे हैं। बाद में ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि दूसरे संस्थानों पर भी रोक लग सकती है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि किस खबर या रिपोर्ट के आधार पर इन तीनों संस्थानों पर कार्रवाई की गई। 

ट्रंप ने साथ ही कहा कि देश को “ईमानदार खबर” चाहिए। सवाल बस इतना है कि ईमानदार खबर की परिभाषा कौन तय करेगा - पत्रकार या राष्ट्रपति कार्यालय?

तीनों संस्थानों के साथ क्या हुआ?

ट्रंप के ऐलान के बावजूद शुक्रवार दोपहर तक CNN, MS NOW और Politico के पत्रकार व्हाइट हाउस परिसर में काम कर रहे थे। प्रशासन की ओर से यह साफ नहीं किया गया कि प्रतिबंध किस प्रक्रिया के तहत लागू होगा और पत्रकारों की पहुंच वास्तव में कैसे रोकी जाएगी। 

CNN ने कहा कि उसके पत्रकारों को संविधान के तहत बिना सरकारी हस्तक्षेप के रिपोर्टिंग करने का अधिकार है। Politico ने भी कहा कि वह व्हाइट हाउस की रिपोर्टिंग जारी रखेगा और अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करेगा। 

मामला प्रेस की आजादी तक क्यों पहुंच गया?

अमेरिकी संविधान का पहला संशोधन प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करता है। व्हाइट हाउस संवाददाता संघ ने कहा कि पत्रकारों की पहुंच इस आधार पर नहीं रोकी जा सकती कि राष्ट्रपति को किसी मीडिया संस्थान की खबरें, रिपोर्टिंग या सवाल पसंद नहीं हैं। 

प्रेस की आजादी से जुड़े संगठनों ने भी इस कदम पर आपत्ति जताई है। Reporters Committee for Freedom of the Press के अध्यक्ष ने कहा कि सरकार किसी मीडिया संस्थान को उसकी रिपोर्टिंग पसंद नहीं आने के कारण बाहर नहीं कर सकती। हालांकि, इस मामले की अंतिम कानूनी स्थिति अदालतों के फैसलों से तय होगी। 

पहले भी हो चुका है ऐसा विवाद

ट्रंप और मीडिया के बीच टकराव नया नहीं है। उनके पहले कार्यकाल में CNN के पत्रकार जिम एकोस्टा की प्रेस मान्यता रद्द की गई थी। CNN अदालत पहुंचा और अदालत ने अस्थायी रूप से उनका प्रेस पास बहाल करने का आदेश दिया था। बाद में उनकी मान्यता स्थायी रूप से बहाल कर दी गई। 

इस बार मामला तीन संस्थानों तक पहुंच चुका है और ट्रंप ने आगे और मीडिया संस्थानों पर कार्रवाई का संकेत दिया है। फिलहाल असली सवाल यह है कि व्हाइट हाउस इस घोषणा को किस तरह लागू करता है - क्योंकि बयान देना आसान है, लेकिन संविधान की चौखट पर हर आदेश की अपनी परीक्षा होती है।