ग्रीनलैण्ड पर ट्रंप का बड़ा ऐलान: अमेरिका को स्थायी सुरक्षा अधिकार, डेनमार्क-ग्रीनलैंड से समझौते की पुष्टि
ग्रीनलैंड पर अमेरिका-डेनमार्क समझौते में अमेरिका को स्थायी सुरक्षा अधिकार मिलेंगे, जबकि ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन रहेगा। अब समझौते पर हस्ताक्षर होंगे।
संपादकीय सार (मुख्य बिंदु)Key Facts
- १.डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच एक समझौते की घोषणा की है।
- २.यह समझौता अमेरिका को ग्रीनलैंड की सुरक्षा पर स्थायी नियंत्रण प्रदान करेगा।
- ३.समझौते के तहत अमेरिका ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाएगा और विरोधियों को सैन्य अड्डा बनाने से रोकेगा।
- ४.ग्रीनलैंड की डेनमार्क के साथ संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता बरकरार रहेगी, यह अमेरिका में शामिल नहीं होगा।
- ५.समझौते पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हस्ताक्षर होने की उम्मीद है, जिसके बाद संसदीय मंजूरी आवश्यक होगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर महीनों से चल रहे विवाद के बीच बड़ा ऐलान किया है। ट्रंप ने 18 सितंबर को कहा कि अमेरिका ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत अमेरिका को ग्रीनलैंड की सुरक्षा और उससे जुड़ी दूसरी जरूरतों पर स्थायी नियंत्रण मिलेगा। हालांकि, समझौते की पूरी कानूनी शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं।
लेकिन यहां सबसे पहले एक बात साफ कर देना जरूरी है। इस समझौते का मतलब ग्रीनलैंड का अमेरिका में विलय या उसकी संप्रभुता का अमेरिका को हस्तांतरण नहीं है। मौजूदा जानकारी के मुताबिक ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन ही रहेगा, जबकि अमेरिका को वहां अपनी सैन्य मौजूदगी, पहुंच और सुरक्षा व्यवस्था को विस्तार देने के अधिकार मिलेंगे। समझौते को डेनमार्क और ग्रीनलैंड की संसदों की जरूरी मंजूरी भी लेनी होगी।
आखिर समझौते में क्या तय हुआ?
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका को ग्रीनलैंड में सुरक्षा और उससे जुड़ी सभी जरूरतों पर स्थायी अधिकार मिलेगा। इसके साथ ही अमेरिका वहां बड़ी सैन्य मौजूदगी विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। समझौते में ऐसे गैर-NATO देशों को ग्रीनलैंड में सैन्य अड्डा बनाने या संवेदनशील निवेश करने से रोकने की व्यवस्था भी बताई गई है, जिन्हें अमेरिका सुरक्षा के लिए खतरा मानता है।
रॉयटर्स के मुताबिक समझौते से अमेरिका को ग्रीनलैंड में सैन्य पहुंच, बेसिंग और हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल के स्थायी अधिकार मिल सकते हैं। यह व्यवस्था पहले से मौजूद अमेरिकी सैन्य समझौतों को आगे बढ़ाती है। ग्रीनलैंड में अमेरिका का पिटुफिक स्पेस बेस पहले से मौजूद है।
ग्रीनलैंड ने क्या कहा?
ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने समझौते पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। डेनमार्क के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में नीलसन ने कहा कि वह इस बात से उत्साहित हैं कि ऐसा समझौता होने जा रहा है, जो ग्रीनलैंड, डेनमार्क, अमेरिका और पश्चिमी गठबंधन की सुरक्षा को मजबूत करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि समझौता ग्रीनलैंड के हितों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में उसकी जगह को मान्यता देता है और यह सभी के हित में है।
यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्रीनलैंड लंबे समय से अपनी राजनीतिक स्थिति और भविष्य को लेकर संवेदनशील रहा है। समझौते में सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ ग्रीनलैंड के हितों को मान्यता देने की बात भी शामिल की गई है।
डेनमार्क ने क्या कहा?
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कहा कि प्रस्तावित समझौता आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र में साझा सुरक्षा को मजबूत करेगा। उन्होंने साथ ही स्पष्ट किया कि समझौता डेनमार्क के साम्राज्य की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता तथा ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को मान्यता देता है।
तीनों पक्षों के बीच समझौते पर अगले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। इसके बाद इसे लागू करने के लिए संबंधित राष्ट्रीय संसदीय प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
फिर इतना बड़ा विवाद क्यों हुआ था?
ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और डेनमार्क के बीच तनाव की शुरुआत केवल सैन्य सुरक्षा से नहीं हुई थी। ट्रंप लंबे समय से ग्रीनलैंड के रणनीतिक महत्व पर जोर देते रहे हैं और पहले अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड को अपने नियंत्रण में लेने की बात भी सामने आती रही थी। डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने इसके जवाब में अपनी संप्रभुता और आत्मनिर्णय के अधिकार पर जोर दिया था।
अब सामने आया समझौता उस पुराने विवाद से अलग रास्ता अपनाता दिख रहा है। इसमें ग्रीनलैंड की संप्रभुता को बदले बिना अमेरिका को वहां सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों के लिए ज्यादा स्थायी अधिकार देने की व्यवस्था की जा रही है।
आगे क्या होगा?
अगला महत्वपूर्ण कदम समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर और उसके बाद संसदीय मंजूरी है। फिलहाल समझौते की पूरी कानूनी भाषा सार्वजनिक नहीं हुई है, इसलिए अमेरिका को मिलने वाले अधिकारों की सटीक सीमा और भविष्य में कितने नए सैन्य ठिकाने या सुविधाएं विकसित की जाएंगी, इसकी पूरी तस्वीर अभी साफ नहीं है।
इतना जरूर स्पष्ट है कि ग्रीनलैंड की स्थिति बदलने के बजाय वहां अमेरिका की सुरक्षा और सैन्य भूमिका को स्थायी रूप से मजबूत करने की दिशा में समझौता हुआ है। इसी वजह से इस समझौते को समझने के लिए सुरक्षा अधिकार और संप्रभुता—इन दोनों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
